Wednesday, 16 April 2014

उन्ही चरणों में मस्तक झुका के तो देख |

जरा तारों से तारे मिलाके तो देख,
ज़रा मोहन को दिल से बुला के तो देख,
प्रभु खिचे हुए बंधे हुए चले आयेंगे ।

पाया धन्ना ने पत्थर को प्रभु मान कर ।
पाया मीरा ने विष का अमर पान कर ॥
पाया केवट ने धो धो चरण धुल को ।
उन्ही चरणों में मस्तक झुका के तो देख ||1||

पाया जिस ने भी उसको मिला प्रेम धाम।
तारे पत्थर लिखा जिनपे रघुवर का नाम ॥
तेरी नैया किनारे से क्यूं ना लगे ।
नाम उनका तू दिल पे लिखा के तो देख ||2||

वो है ठाकुर पुजारी तू बन के तो देख ।
वो हैं दाता भिखारी तू बन के तो देख ॥
उनके दर से नहीं कोई खाली गया।
उनके आगे झोली फैला के तो देख ||3||

No comments:

Post a Comment