तुमसे मिलते ही वो कुछ बेबाक़ हो जाना मेरा
और तेरा दांतों में वो ऊंगली दबाना याद है~~
तुमको जब तनहा कभी पाना तो अज़राहे लिहाज़
हाले दिल बातों ही बातों में जताना याद है~~
खींच लेना वो मेरा परदे का कोना दफ़ातन
और दुपट्टे से तेरा वो मुंह छुपाना याद है~~
ग़ैर की नज़रों से बचके सबकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़
वो तेरा चोरी छिपे रातों को आना याद है~~
आ गया जब वस्ल की शब भी कहीं ज़िक्रे फ़िराक
वो तेरा रो रोके मुझको भी रुलाना याद है~~
दोपहर की धूप में मेरे बुलाने के लिए
वो तेरा कोठे पे नंगे पांव आना याद है~~
बेरुखी के साथ सुनना दर्द ए दिल की दास्ताँ
वो कलाई में तेरा कंगन घुमाना याद है ~~
वक़्त ए रुखसत अलविदा का लफ्ज़ कहने के लिए
वो तेरे सूखे लबों का थरथराना याद है~~
चोरी चोरी हमको तुम आकर मिले थे जिस जगह
मुद्दतें गुज़री पर अबतक वो ठिकाना याद है~~~~
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