हनुमान यानी श्रीराम के परम श्रेष्ठ भक्त। अंजनी के पुत्र इसीलिए अंजनेय कहा जाता है। पिता केसरी इसीलिए केसरीनंदन कहा जाता है। अत्यंत बलशाली, परम पराक्रमी, जितेंद्रिय, ज्ञानियों में अग्रगण्य एवं श्रीराम के अनन्य भक्त ऐसे श्री हनुमान के सहस्त्र नाम हैं। उन्हें चिरंजीवी भी कहा जाता है। उनके चरित्र की अनेक कथाएं भी प्रचलित हैं। कैसे हुए चिरंजीवी? यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है। उनकी आयु के रहस्य का विवेचन करना कठिन है। वैसे अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय ये आठ चिरंजीवी माने जाते हैं। हनुमान अजर-अमर हैं। इस संदर्भ में आनंद रामायण, बाल्मीकि रामायण, रामचरित मानस सहित अनेक महाकाव्यों में उल्लेख भी मिलता है।
हनुमान के जन्म को लेकर मतभेद है। कई लोग हनुमान के जन्म की तिथि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी मानते हैं तो कुछ चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को। वैसे ज्यादातर जगहों पर चैत्र माह की पूर्णिमा को ही मान्यता मिली हुई है। बहरहाल श्री हनुमान राम के अनन्य भक्तों में हैं। इसका प्रमाण यह मिलता है कि लंका विजय के बाद श्री हनुमान ने भगवान श्रीराम में सदा अपनी निश्छल भक्ति की याचना की थी। श्रीराम ने उन्हें अपने हृदय से लगा कर कहा था, 'कपि श्रेष्ठ ऐसा ही होगा, संसार में मेरी कथा जब तक प्रचलित रहेगी, तब तक तुम्हारी कीर्ति भी अमिट रहेगी और शरीर में प्राण भी रहेंगे। तुमने मुझ पर जो उपकार किया है, उसे मैं चुकता नहीं कर सकता।'
हनुमान के जन्म को लेकर मतभेद है। कई लोग हनुमान के जन्म की तिथि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी मानते हैं तो कुछ चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को। वैसे ज्यादातर जगहों पर चैत्र माह की पूर्णिमा को ही मान्यता मिली हुई है। बहरहाल श्री हनुमान राम के अनन्य भक्तों में हैं। इसका प्रमाण यह मिलता है कि लंका विजय के बाद श्री हनुमान ने भगवान श्रीराम में सदा अपनी निश्छल भक्ति की याचना की थी। श्रीराम ने उन्हें अपने हृदय से लगा कर कहा था, 'कपि श्रेष्ठ ऐसा ही होगा, संसार में मेरी कथा जब तक प्रचलित रहेगी, तब तक तुम्हारी कीर्ति भी अमिट रहेगी और शरीर में प्राण भी रहेंगे। तुमने मुझ पर जो उपकार किया है, उसे मैं चुकता नहीं कर सकता।'
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