Friday, 23 May 2014


भयंकर सर्प जिस प्रकार विष से भरा हुआ होता है और वह सर्प जिस किसी भी प्राणी को डसे, वही मर जाता है। तदनुरूप ही यह मन भी मानो भयंकर सर्प की तरह शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध आदि विषयों के आकर्षण रूपी विष से व्याप्त है और जिस प्रकार भयंकर सर्प जिसको डस लेवे, तो जहर उतारने वाला वैद्य तो फिर भी रक्षा कर सकता है अन्यथा निर्विष होना सम्भव नहीं है। इसी प्रकार मनरूपी सर्प से डसे हुए विषयों से लिपायमान प्राणी को भी सतगुरु रूपी गारूड़ी वैद्य भले ही रक्षा कर लेवे अन्यथा विषयासक्ति से मुक्त होने का और कोई उपाय नहीं है। 

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