Sunday, 18 May 2014

आप स्वयं को आनन्द मे पाओगे

निंदा तो होती रहेगी, लोग आपमें बुराईयाँ भी निकालेंगे, कोइ ढोगी तो कोइ पाखंडी कहेगा, कोइ व्यापारी तो कोइ दुराचारी कहेगा, इन सभी बातों का अपने मन पर कोइ प्रभाव ना पडने देना, सतत साधना मार्ग पर आगे बढ़ते जाना।
स्मरण रखो लोगो की ज्यादा परवाह मत करना क्योकि सभी को प्रसन्न करने मे लग गये तो इष्ट को प्रसन्न करने से चुक जाओगे और सभीको स्पष्टीकरण देने लग गये तो स्वयं का मार्ग अस्पष्ट हो जायेगा। भटक जाओगे, अतः लोग पत्थर फेंके तो घबराना मत उन्ही पत्थरो से सफलता कि सीडी बना लेना। फिर देखना आप स्वयं को आनन्द मे पाओगे।

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