जिस दिल में किसी के लिए नफरत आ जाती है
उस दिल में फिर प्यार का फुल नहीं खिलता बल्कि सिर्फ नफरत के काटे ही पैदा होते है जिसकी चुभन आपके साथ में रहने वालो को भी महसूस होती है
नफरत करने वाला जब हमें ही पसंद नहीं आता तो भगवान् को कैसे पसंद आएगा
मत रख इतनी नफरत अपने दिल मे इन्सान . . .
जिस दिल मे नफरत होती है उसमे " रब " नही बसता
उस दिल में फिर प्यार का फुल नहीं खिलता बल्कि सिर्फ नफरत के काटे ही पैदा होते है जिसकी चुभन आपके साथ में रहने वालो को भी महसूस होती है
नफरत करने वाला जब हमें ही पसंद नहीं आता तो भगवान् को कैसे पसंद आएगा
मत रख इतनी नफरत अपने दिल मे इन्सान . . .
जिस दिल मे नफरत होती है उसमे " रब " नही बसता
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