Wednesday, 7 May 2014

स्मरण रहे कि ध्यान, समाधि आदि में बैठने वाले आसनों में मेरुदण्ड,

पद्मासन
शांति या सुख का अनुभव
करना या बोध करना अलौकिक
ज्ञान प्राप्त करने जैसा है, यह
तभी संभव है, जब आप
पूर्णतः स्वस्थ हों।
अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त करने के
यूँ तो कई तरीके हैं, उनमें से ही एक
आसान तरीका है योगासन व
प्राणायाम करना। हम
आपको पद्मासन से परिचित
करवाते हैं-
पद्मासन
विधि: जमीन पर बैठकर बाएँ पैर
की एड़ी को दाईं जंघा पर इस
प्रकार रखते हैं कि एड़ी नाभि के
पास आ जाएँ। इसके बाद दाएँ पाँव
को उठाकर बाईं जंघा पर इस
प्रकार रखें
कि दोनों एड़ियाँ नाभि के पास
आपस में मिल जाएँ।
मेरुदण्ड सहित कमर से ऊपरी भाग
को पूर्णतया सीधा रखें। ध्यान रहे
कि दोनों घुटने जमीन से उठने न
पाएँ। तत्पश्चात
दोनों हाथों की हथेलियों को गोद में
रखते हुए स्थिर रहें।
इसको पुनः पाँव बदलकर
भी करना चाहिए। फिर
दृष्टि को नासाग्रभाग पर स्थिर
करके शांत बैठ जाएँ।
विशेष
स्मरण रहे कि ध्यान,
समाधि आदि में बैठने वाले
आसनों में मेरुदण्ड, कटिभाग और
सिर को सीधा रखा जाता है और
स्थिरतापूर्वक बैठना होता है।
ध्यान समाधि के काल में नेत्र बंद
कर लेना चाहिए। आँखे दीर्घ काल
तक खुली रहने से
आँखों की तरलता नष्ट होकर उनमें
विकार पैदा हो जाने
की संभावना रहती है।
लाभ
यह आसन पाँवों की वातादि अनेक
व्याधियों को दूर करता है। विशेष
कर कटिभाग
तथा टाँगों की संधि एवं तत्संबंधित
नस-नाड़ियों को लचक, दृढ़ और
स्फूर्तियुक्त बनाता है। श्वसन
क्रिया को सम रखता है। इन्द्रिय
और मन को शांत एवं एकाग्र
करता है।
इससे बुद्धि बढ़ती एवं सात्विक
होती है। चित्त में स्थिरता आती है।
स्मरण शक्ति एवं विचार
शक्ति बढ़ती है। वीर्य
वृद्धि होती है। सन्धिवात ठीक
होता है।

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