Monday, 12 May 2014

कुछ क्षणों के पहले तक आप क्या देख रहे थे।

           :नींद और सपने :: वैज्ञानिक दृष्टिकोण 

नींद के दौरान हमारे मस्तिष्क में कुछ बदलाव होते हैं लेकिन ये बदलाव क्या होते हैं और क्यों होते हैं, इस बात को ज्यादातर विशेषज्ञ लोग भी नहीं जानते हैं। जानकार लोगों की भी बहुत सारी जानकारी अंदाजा लगाने पर निर्भर करती है, इसलिए आम तौर पर नींद से जुड़े बहुत से पहलुओं और सपने देखने से जुड़ी विशेष जानकारियों की हमें कम जानकारी है। हम सभी जानते हैं ‍कि एक लम्बे समय से नींद को एक ऐसी प्रक्रिया के तौर पर समझा जाता रहा है जो दिन भर की घटनाओं को अलग-अलग कर छांटती है और इन्हें स्टोर कर लेती है। इस बारे में यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना की एक क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट और इंटीग्रेटिव स्लीप एंड ड्रीम मेडिसिन के विशेषज्ञ रूबिन नाइमन कहते हैं कि मस्तिष्क को एक दूसरे मन की तरह समझें। उनका कहना है कि रात में मस्तिष्क लाक्षणिक रूप से सूचनाओं को निगलता है, छानता है और पचाता है और मन की तरह इन्हें मिटा भी देता है।' इस तरह दिमाग जो भी अपने पास रखता है, वह हमारे व्यक्तित्व का एक हिस्सा बन जाता है। उनका कहना है कि सपने देखना मस्तिष्क की पाचन व्यवस्था जैसी है। लेकिन सपने देखने के बारे में बहुत कुछ ऐसा है जिसके बारे में हम सोचते हैं कि जानते हैं। यहां मस्तिष्क से संबंधित कुछेक अल्प ज्ञान तथ्य और कल्पित बातें दी जा रही हैं। संभवत: हमने सुन रखा है कि सपने तभी आते हैं जब हम रैपिट आई मूवमेंट (आरइएम) नींद की स्थिति में होते हैं। लेकिन नाइमन का कहना है कि वास्तव में हम सारी रात सपने देखते रहते हैं। आरइएम नींद के दौरान हम अधिक सपने देखने की स्थिति में होते हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि अगर आप सपने नहीं देख रहे हैं तो सपने नहीं आ रहे हैं। जैसे जैसे रात बढ़ती है आरइएम नींद का समय बढ़ता जाता है, इस कारण से हमारे ज्यादातर सपने रात के तीसरे प्रहर में आते हैं।
हालांकि कुछ सपने रेम नींद से बाहर भी आते हैं जिसके अंतर्गत आंखों की गतिविधियां तेज होती है, यह नींद भी उतनी ही तेज होती है जितनी कि हम कह सकते हैं ‍‍क‍ि कीड़े और मछलियों की प्रजातियों के प्राणी भी सपने देखते हैं। यह कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का निष्कर्ष है। लेकिन पापुलर साइंस में जानकारी दी गई है कि सभी स्तनपायी जीव, रेंगने वाले जलचर और कुछ तरह की चिडि़यां रेम नींद का अनुभव करती हैं। और यह भी एक तरह के सपने ही हैं। 
अगर आप एक अलार्म के कारण एकाएक नींद से जाग जाते हैं तो आप पूरी तरह से भूल जाते हैं कि कुछ क्षणों के पहले तक आप क्या देख रहे थे। नायमन कहते हैं कि सपने याद रखने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप कुछ मिनटों के दौरान खुद को धीरे-धीरे जागने दें। इस दौरान आप खुद को ऐसे जगाएं जैसेकि नशा उतर रहा हो। आप तेजी से गायब होने वाली छवियों को सख्ती से पकड़ने की कोशिश ना करें। वे कहते हैं कि अगर आप एक सपने का पीछा करते हैं तो यह तेजी से भाग जाएगा। 
जिन लोगों को सपने याद रहते हैं उनकी मस्तिष्क की गतिविधियां अलग होती हैं। इसी वर्ष किए गए एक अध्ययन से यह बात सामने आई है कि जिन लोगों के दिमाग के एक हिस्से, टेम्पेरो- पैरीटल जंक्शन, अधिक सक्रिय होता है तो वे नियमित तौर पर अपने सपनों को याद करते हैं। पर जो लोग कभी ही सपनों को याद करते हैं उन्हें सपने अधिक याद नहीं रखते हैं। इस शोध के दौरान प्रतिभागियों की नींद में ही अंतर नहीं था वरन तब भी अंतर पाए गए थे जबकि वे जागृत अवस्था में थे। इससे पहले की एक शोध में पाया गया कि जिन लोगों को अधिक सपने याद रह जाते हैं वे लोग नींद के दौरान और जागे होने की हालत में भी आवाजों को लेकर अधिक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं। 
सपने में भी शरीर इस तरह से प्रतिक्रिया जाहिर करता है मानो हम जागृत अवस्था में हों। नायमन का कहना है कि सपने में जब आप किसी व्यक्ति को देखते हैं कि वह कुछ ऐसा कर रहा है जो कि निराश कर देने वाला है या तकलीफ देह है तो आप उन भावनाओं को याद नहीं कर सकते हैं और पूरी तरह से संतुलित नहीं रह सकते हैं क्योंकि सपने में जो कुछ आपने अनुभव किया है, उसका असर आपके शरीर पर बना रहता है और इसका असर आपके मस्तिष्क पर भी होता है। यह अनुभव ठीक ऐसे होता है मानो इसे आपने जागृत अवस्था में अनुभव किया हो। किसी बुरे सपने का यह असर होता है कि आपका रक्त चाप बढ़ जाता है या फिर दिल की धडकन बढ़ जाती है। 
हालांकि हम यह कल्पना कर सकते हैं कि सपने मात्र कुछ सेकंडों के लिए आते हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि सपने बीस, तीस मिनट से लेकर 60 मिनट तक के हो सकते हैं। नायमन कहते हैं कि रात की शुरुआत में सपने दो मिनट तक लम्बे हो सकते हैं लेकिन रेम समय बढ़ने के साथ इनकी अवधि बढ़ती जाती है और यह अवधि रात के बढ़ने के साथ आगे बढ़ती जाती है। खराब सपने हमेशा निश्चित तौर पर डराने वाले होते हैं लेकिन इनके साथ और भी कई भावनाएं जुड़ी होती हैं। इसी वर्ष किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 331 लोगों के सपनों का अध्ययन किया और पाया कि बहुत से बुरे सपनों और खराब सपनों से असफलता, चिंता, भ्रम, दुख और अपराध बोध की भावना सामने आई। शोधकर्ताओं ने यह भी पता लगाया कि पुरुषों के ज्यादातर खराब सपने हिंसा और शारीरिक हमले से जुड़े होते हैं जबकि महिलाओं के बुरे सपने संबंधों में टकराव पर अधिक आधारित होते हैं। आपके सपने तबतक विचित्र नहीं होते हैं जब तक कि आप उन्हें विचित्र नहीं बताते हैं। नायमन का कहना है कि जब आप सपना देख रहे हैं तो भले ही यह कितना ही विचित्र हो सकता है। मानाकि आप एक बहुत बड़ी हरी गिलहरी और क्वीन मैरी के साथ पोकर खेल रहे हैं, यह विचित्र नहीं होता है। वे कहते हैं कि यह तब विचित्र हो जाता है जबकि आप जाग जाते हैं और एक जागृत संसार में कदम रखते हैं और समझते हैं कि यह आपको विचित्र प्रतीत होता है। सपना देखते हुए और जागृत अवस्थाओं में विचित्र दुनियाओं में तुलना करना ठीक ऐसा है जैसेकि आप दो पूरी तरह से अलग संस्कृतियों में खान पान के रिवाजों की तुलना कर रहे हैं। एक की तुलना में दूसरी आपको विचित्र लग सकती है। 
बहुत सारे लोग मानते हैं कि सपने में मर जाने का अर्थ होता है कि आप मर चुके हैं। लेकिन नायमन कहते हैं कि इस तरह की बातों में कोई सच्चाई नहीं होती है। वे कहते हैं कि अगर आपको कभी सपने में मरने का मौका मिलता है तो बिना किसी चिंता के मर जाएं। वे कहते हैं कि सपनों में मौत को लेकर बहुत सारे लोग इसे प्रभावहीन बदलाव के तौर पर पाते हैं। उनका कहना है कि कुछ लोग कहेंगे कि चेतनता शरीर की अमरता और स्वतंत्रता है लेकिन आप इसे किसी तरह से देखें यह एक मनोरंजक अनुभव सिद्ध होता है।

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