ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
परमात्माकी प्राप्तिका स्थान ह्रदय है l ज्ञान ह्रदयमें विराजमान है l गुरुसे जो ज्ञान मिलता है, वह वास्तवमें अपने ही भीतर है l उस ज्ञानके द्वारा हम परमात्माको जान लेते हैं l गुरु ज्ञान देते नहीं हैं, प्रत्युत सबके ह्रदयमें विराजमान ज्ञानरूप परमात्माकी जागृति करते हैं l
भगवान् कृष्ण सबके गुरु हैं और उनका मन्त्र अथवा उपदेश है गीता l कोई मनुष्य पंडिताईके जोरसे गीताका अर्थ नहीं समझ सकता l भगवान् के शरण होनेसे ही गीताका अर्थ प्रकट होता है l भगवान् गीतासे बहुत राजी होते हैं l गीतापाठसे वे दर्शन भी दे सकते हैं l गीता-रामायण ग्रन्थ जहाँ पड़े रहते हैं, वहाँ भूत-पिशाच नहीं आते l उन ग्रंथोंको प्रणाम करनेसे बड़ी शक्ति मिलती है l
गीताका पाठ-मनन करनेवाला प्रत्येक प्रश्नका उत्तर दे सकता है l प्रतिदिन गीताका पाठ, विचार करना शुरू कर दें l गीताके अनुसार अपना व्यवहार करें, जीवन बनायें तो दुःख, संताप, हलचल सब मिट जायगी l एक भी आदमी ऐसा नहीं हुआ, जिसकी भोग तथा संग्रहसे तृप्ति हो गयी हो l अविनाशीकी भूख विनाशीसे कैसे मिटेगी ?
भगवान् के श्वाससे वेद प्रकट हुए – ‘यस्य निश्वसितं वेदा:’ l जब श्वासका इतना प्रभाव तो फिर वाणी (गीता) – का कितना प्रभाव होगा !
परमात्माकी प्राप्तिका स्थान ह्रदय है l ज्ञान ह्रदयमें विराजमान है l गुरुसे जो ज्ञान मिलता है, वह वास्तवमें अपने ही भीतर है l उस ज्ञानके द्वारा हम परमात्माको जान लेते हैं l गुरु ज्ञान देते नहीं हैं, प्रत्युत सबके ह्रदयमें विराजमान ज्ञानरूप परमात्माकी जागृति करते हैं l
भगवान् कृष्ण सबके गुरु हैं और उनका मन्त्र अथवा उपदेश है गीता l कोई मनुष्य पंडिताईके जोरसे गीताका अर्थ नहीं समझ सकता l भगवान् के शरण होनेसे ही गीताका अर्थ प्रकट होता है l भगवान् गीतासे बहुत राजी होते हैं l गीतापाठसे वे दर्शन भी दे सकते हैं l गीता-रामायण ग्रन्थ जहाँ पड़े रहते हैं, वहाँ भूत-पिशाच नहीं आते l उन ग्रंथोंको प्रणाम करनेसे बड़ी शक्ति मिलती है l
गीताका पाठ-मनन करनेवाला प्रत्येक प्रश्नका उत्तर दे सकता है l प्रतिदिन गीताका पाठ, विचार करना शुरू कर दें l गीताके अनुसार अपना व्यवहार करें, जीवन बनायें तो दुःख, संताप, हलचल सब मिट जायगी l एक भी आदमी ऐसा नहीं हुआ, जिसकी भोग तथा संग्रहसे तृप्ति हो गयी हो l अविनाशीकी भूख विनाशीसे कैसे मिटेगी ?
भगवान् के श्वाससे वेद प्रकट हुए – ‘यस्य निश्वसितं वेदा:’ l जब श्वासका इतना प्रभाव तो फिर वाणी (गीता) – का कितना प्रभाव होगा !
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