Thursday, 8 May 2014

एक ही लक्ष्य हो मेरे जीवन का। और वो है राम राम

सोते जागते उठते बैठते खाते पीते बस एक ही नाम मेरी जुबान पर हो। एक ही लक्ष्य हो मेरे जीवन का। और वो है राम राम राम राम
राम हि राम बस राम हि राम ।
और नाहि काहू से काम। 
राम हि राम बस ...

तन में राम तेरे मन में राम । 
मुख में राम वचन में राम ।
जब बोले तब राम हि राम । 
और नाहि काहू से काम ।
राम हि राम बस रामहि राम ।।

जागत सोवत आठहु याम । 
नैन लखें शोभा को धाम ।
ज्योति स्वरूप राम को नाम । 
और नाहि काहू से काम ।
राम हि राम बस रामहि राम ।।

कीर्तन भजन मनन में राम । 
ध्यान जाप सिमरन में राम ।
मन के अधिष्ठान में राम । 
और नाहिं काहू सो काम ।
राम हि राम बस रामहि राम ।

सब दिन रात सुबह और शाम । 
बिहरे मन मधुबन में राम ।
परमानन्द शान्ति सुख धाम । 
और नाहि काहू से काम ।
राम हि राम बस रामहि राम । 

No comments:

Post a Comment