एक फकीर वृंदावन जा रहे थे।
रास्ते में उन्हें एक सौदागर मिला,
जो पांच गधों पर बड़ी- बड़ी गठरियां लादे हुए #वृंदावन से कुछ चीज़े ले कर वृंदावन से बहार बेचने जा रहा था।
गठरियां बहुत भारी थीं,
जिसे गधे बड़ी मुश्किल से ढो पा रहे थे।
फकीर ने सौदागर से प्रश्न किया,
‘वृंदावन से ऐसी कोन से चीज़े ले कर इन गठरियों में तुमने में रेखी है,
जिन्हें ये बेचारे गधे ढो नहीं पा रहे हैं?’
सौदागर ने जवाब दिया,
‘इनमें इंसान के
इस्तेमाल की चीजें भरी हैं। उन्हें बेचने मैं बाजार जा रहा हूं।’
फकीर ने पूछा, ‘अच्छा! कौन-कौन सी चीजें हैं,
जरा मैं भी तो जानूं!’
सौदागर ने कहा,
‘यह जो पहला गधा आप देख रहे हैं इस पर #अत्याचार की गठरी लदी है।’
फकीर ने पूछा, ‘भला अत्याचार कौन खरीदेगा?’
सौदागर ने कहा,
‘इसके खरीदार हैं राजा- महाराजा और सत्ताधारी लोग। काफी ऊंची दर पर बिक्री होती है इसकी।’
फकीर ने पूछा,
‘इस दूसरी गठरी में क्या है?’
सौदागर बोला,
‘यह गठरी #अहंकार से
लबालब भरी है और इसके खरीदार हैं पंडित और विद्वान।
तीसरे गधे पर #ईर्ष्या की गठरी लदी है और इसके ग्राहक हैं वे धनवान लोग,
जो एक दूसरे की प्रगति को बर्दाश्त नहीं कर पाते।
इसे खरीदने के लिए तो लोगों का तांता लगा रहता है।’
फकीर ने पूछा, ‘अच्छा!
चौथी गठरी में क्या है भाई?’
सौदागर ने कहा, ‘इसमें #बेईमानी भरी है और इसके ग्राहक हैं वे कारोबारी,
जो बाजार में धोखे से की गई बिक्री से काफी फायदा उठाते हैं।
इसलिए बाजार में इसके भीखरीदार तैयार खड़े हैं।’
फकीर ने पूछा,
‘अंतिम गधे पर क्या लदा है?’
सौदागर ने जवाब दिया,
‘इस गधे पर छल-कपट से भरी गठरी रखी है और इसकी मांग उन औरतों में बहुत ज्यादा है जिनके
पास घर में कोई काम-धंधा नहीं हैं और जो छल-कपट का सहारा लेकर दूसरों की लकीर छोटी कर अपनी लकीर बड़ी करने की कोशिश करती रहती हैं।
वे ही इसकी खरीदार हैं।’
तभी महात्मा की नींद खुल गई।
इस सपने में उनके कई प्रश्नों का उत्तर मिल गया था
और
शायद आप को..
रास्ते में उन्हें एक सौदागर मिला,
जो पांच गधों पर बड़ी- बड़ी गठरियां लादे हुए #वृंदावन से कुछ चीज़े ले कर वृंदावन से बहार बेचने जा रहा था।
गठरियां बहुत भारी थीं,
जिसे गधे बड़ी मुश्किल से ढो पा रहे थे।
फकीर ने सौदागर से प्रश्न किया,
‘वृंदावन से ऐसी कोन से चीज़े ले कर इन गठरियों में तुमने में रेखी है,
जिन्हें ये बेचारे गधे ढो नहीं पा रहे हैं?’
सौदागर ने जवाब दिया,
‘इनमें इंसान के
इस्तेमाल की चीजें भरी हैं। उन्हें बेचने मैं बाजार जा रहा हूं।’
फकीर ने पूछा, ‘अच्छा! कौन-कौन सी चीजें हैं,
जरा मैं भी तो जानूं!’
सौदागर ने कहा,
‘यह जो पहला गधा आप देख रहे हैं इस पर #अत्याचार की गठरी लदी है।’
फकीर ने पूछा, ‘भला अत्याचार कौन खरीदेगा?’
सौदागर ने कहा,
‘इसके खरीदार हैं राजा- महाराजा और सत्ताधारी लोग। काफी ऊंची दर पर बिक्री होती है इसकी।’
फकीर ने पूछा,
‘इस दूसरी गठरी में क्या है?’
सौदागर बोला,
‘यह गठरी #अहंकार से
लबालब भरी है और इसके खरीदार हैं पंडित और विद्वान।
तीसरे गधे पर #ईर्ष्या की गठरी लदी है और इसके ग्राहक हैं वे धनवान लोग,
जो एक दूसरे की प्रगति को बर्दाश्त नहीं कर पाते।
इसे खरीदने के लिए तो लोगों का तांता लगा रहता है।’
फकीर ने पूछा, ‘अच्छा!
चौथी गठरी में क्या है भाई?’
सौदागर ने कहा, ‘इसमें #बेईमानी भरी है और इसके ग्राहक हैं वे कारोबारी,
जो बाजार में धोखे से की गई बिक्री से काफी फायदा उठाते हैं।
इसलिए बाजार में इसके भीखरीदार तैयार खड़े हैं।’
फकीर ने पूछा,
‘अंतिम गधे पर क्या लदा है?’
सौदागर ने जवाब दिया,
‘इस गधे पर छल-कपट से भरी गठरी रखी है और इसकी मांग उन औरतों में बहुत ज्यादा है जिनके
पास घर में कोई काम-धंधा नहीं हैं और जो छल-कपट का सहारा लेकर दूसरों की लकीर छोटी कर अपनी लकीर बड़ी करने की कोशिश करती रहती हैं।
वे ही इसकी खरीदार हैं।’
तभी महात्मा की नींद खुल गई।
इस सपने में उनके कई प्रश्नों का उत्तर मिल गया था
और
शायद आप को..
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