आर्य शब्द का अर्थ : आर्य समाज के लोग इसे आर्य
धर्म कहते हैं, जबकि आर्य किसी जाति या धर्म
का नाम न होकर इसका अर्थ सिर्फ श्रेष्ठ
ही माना जाता है। अर्थात जो मन, वचन और
कर्म से श्रेष्ठ है वही आर्य है। इस प्रकार आर्य धर्म
का अर्थ श्रेष्ठ समाज का धर्म ही होता है।
प्राचीन भारत को आर्यावर्त
भी कहा जाता था जिसका तात्पर्य श्रेष्ठ
जनों के निवास की भूमि था।
हिन्दू इतिहास की भूमिका : जब हम इतिहास
की बात करते हैं तो वेदों की रचना किसी एक
काल में नहीं हुई। विद्वानों ने वेदों के रचनाकाल
की शुरुआत 4500 ई.पू. से मानी है। अर्थात यह
धीरे-धीरे रचे गए और अंतत: कृष्ण के समय में वेद
व्यास द्वारा पूरी तरह से वेद को चार भाग में
विभाजित कर दिया। इस मान से लिखित रूप में
आज से 6508 वर्ष पूर्व पुराने हैं वेद। यह भी तथ्य
नहीं नकारा जा सकता कि कृष्ण के आज से 5500
वर्ष पूर्व होने के तथ्य ढूँढ लिए गए।
हिंदू और जैन धर्म की उत्पत्ति पूर्व
आर्यों की अवधारणा में है जो 4500 ई.पू. (आज से
6500 वर्ष पूर्व) मध्य एशिया से हिमालय तक फैले
थे। कहते हैं कि आर्यों की ही एक शाखा ने
पारसी धर्म की स्थापना भी की। इसके बाद
क्रमश: यहूदी धर्म 2 हजार ई.पू.। बौद्ध धर्म 500
ई.पू.। ईसाई धर्म सिर्फ 2000 वर्ष पूर्व। इस्लाम
धर्म 14 सौ साल पहले हुए।
लेकिन धार्मिक साहित्य अनुसार हिंदू धर्म
की कुछ और धारणाएँ भी हैं। मान्यता यह भी है
कि 90 हजार वर्ष पूर्व इसकी शुरुआत हुई थी।
दरअसल हिंदुओं ने अपने इतिहास को गाकर, रटकर
और सूत्रों के आधार पर मुखाग्र जिंदा बनाए
रखा। यही कारण रहा कि वह इतिहास धीरे-
धीरे काव्यमय और श्रंगारिक होता गया। वह
दौर ऐसा था जबकि कागज और कलम नहीं होते
थे। इतिहास लिखा जाता था शिलाओं पर,
पत्थरों पर और मन पर।
धर्म कहते हैं, जबकि आर्य किसी जाति या धर्म
का नाम न होकर इसका अर्थ सिर्फ श्रेष्ठ
ही माना जाता है। अर्थात जो मन, वचन और
कर्म से श्रेष्ठ है वही आर्य है। इस प्रकार आर्य धर्म
का अर्थ श्रेष्ठ समाज का धर्म ही होता है।
प्राचीन भारत को आर्यावर्त
भी कहा जाता था जिसका तात्पर्य श्रेष्ठ
जनों के निवास की भूमि था।
हिन्दू इतिहास की भूमिका : जब हम इतिहास
की बात करते हैं तो वेदों की रचना किसी एक
काल में नहीं हुई। विद्वानों ने वेदों के रचनाकाल
की शुरुआत 4500 ई.पू. से मानी है। अर्थात यह
धीरे-धीरे रचे गए और अंतत: कृष्ण के समय में वेद
व्यास द्वारा पूरी तरह से वेद को चार भाग में
विभाजित कर दिया। इस मान से लिखित रूप में
आज से 6508 वर्ष पूर्व पुराने हैं वेद। यह भी तथ्य
नहीं नकारा जा सकता कि कृष्ण के आज से 5500
वर्ष पूर्व होने के तथ्य ढूँढ लिए गए।
हिंदू और जैन धर्म की उत्पत्ति पूर्व
आर्यों की अवधारणा में है जो 4500 ई.पू. (आज से
6500 वर्ष पूर्व) मध्य एशिया से हिमालय तक फैले
थे। कहते हैं कि आर्यों की ही एक शाखा ने
पारसी धर्म की स्थापना भी की। इसके बाद
क्रमश: यहूदी धर्म 2 हजार ई.पू.। बौद्ध धर्म 500
ई.पू.। ईसाई धर्म सिर्फ 2000 वर्ष पूर्व। इस्लाम
धर्म 14 सौ साल पहले हुए।
लेकिन धार्मिक साहित्य अनुसार हिंदू धर्म
की कुछ और धारणाएँ भी हैं। मान्यता यह भी है
कि 90 हजार वर्ष पूर्व इसकी शुरुआत हुई थी।
दरअसल हिंदुओं ने अपने इतिहास को गाकर, रटकर
और सूत्रों के आधार पर मुखाग्र जिंदा बनाए
रखा। यही कारण रहा कि वह इतिहास धीरे-
धीरे काव्यमय और श्रंगारिक होता गया। वह
दौर ऐसा था जबकि कागज और कलम नहीं होते
थे। इतिहास लिखा जाता था शिलाओं पर,
पत्थरों पर और मन पर।
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