प्राय: लोग कह दिया करते हैं कि नाम-जप करते समय
भगवान्में मन नहीं लगा तो नाम-जप करना व्यर्थ
है।
......नामजप कभी व्यर्थ हो ही नहीं सकता;
क्योंकि भगवान्के प्रति कुछ-न-कुछ भाव रहनेसे ही नामजप
होता है।
भावके बिना नामजपमें प्रवृति ही नहीं होती।
अत: नामजपका किसी भी अवस्थामें त्याग
नहीं करना चाहिये।
भगवान्में मन नहीं लगा तो नाम-जप करना व्यर्थ
है।
......नामजप कभी व्यर्थ हो ही नहीं सकता;
क्योंकि भगवान्के प्रति कुछ-न-कुछ भाव रहनेसे ही नामजप
होता है।
भावके बिना नामजपमें प्रवृति ही नहीं होती।
अत: नामजपका किसी भी अवस्थामें त्याग
नहीं करना चाहिये।
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