इन खास मंत्रों से घर ही नहीं सफर में भी कर सकते हैं पूरी विष्णु पूजा
हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु जगत के पालन करने वाले देवता है। भगवान विष्णु सात्विक शक्तियों के प्रतीक हैं। शास्त्रों में उनका स्वरूप सौम्य बताया गया है। यही वजह है कि सांसारिक दृष्टि से भगवान विष्णु की उपासना सुख, आनंद, प्रेम, शांति के साथ बल देने वाली मानी जाती है। धार्मिक परंपराओं में विष्णु पूजा की तरह-तरह से विधि-विधान और पूजा सामग्रियों द्वारा बताई गई है। किंतु यहां बताई जा रही भगवान विष्णु की एक ऐसी पूजा जिसमें न किसी पूजा सामग्री की जरूरत होती है, न ही किसी प्रतिमा की।
विष्णु की यह पूजा मन के भावों से की जाती है, जिसे मानस पूजा भी कहते हैं। खास तौर पर विष्णु भक्ति के वैशाख महीने में मानस पूजा का फल पूजा सामग्रियों से की गई पूजा से भी शुभ और अधिक माना गया है। इस पूजा में कोई भी व्यक्ति मन के भावों से जितनी चाहे उतनी मात्रा और बेहतर पूजा सामग्रियां भगवान विष्णु को अर्पित कर सकता है। यहीं नहीं, घर हो या किसी सफर के दौरान भी इस उपाय से पूरी विष्णु पूजा की जा सकती है, क्योंकि इसमें बस, भाव ही अहम होते हैं।
-घर में हों तो सुबह स्नान कर घर के देवालय में पहले भगवान विष्णु इस मंत्र से ध्यान करें-
ॐ संशखचक्र सकिरीट कुण्डल सपीत वस्त्र सरसी रुहेश्र्णम्।
सहार वक्षस्थल कौस्तुभस्त्रियं नमामि विष्णु शिरसा चतुर्भुजम।।
- इसके बाद मन ही मन इन 16 पूजा मंत्रों से विष्णु की मानस पूजा करें-
ॐ पादयो: पाद्यं समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ हस्तयो: अघ्र्य समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ आचमनीयं समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ गन्धं समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ पुष्पं समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ पुष्पमाला समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ धूप समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ दीपं दर्शयामि नारायणाय नम:।
ॐ नैवेद्यं निवेदयामि नारायणाय नम:।
ॐ आचमनीयं समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ ऋतुफलम् समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ पुनराचमनीय समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ पूगीफलं समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ आरार्तिक्यं समर्पयामि नारायणाय नम:।
ऊँ पुष्पाञ्जलि समर्पयामि नारायणाय नम:।
अंत में ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इस मंत्र का जप करें।
हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु जगत के पालन करने वाले देवता है। भगवान विष्णु सात्विक शक्तियों के प्रतीक हैं। शास्त्रों में उनका स्वरूप सौम्य बताया गया है। यही वजह है कि सांसारिक दृष्टि से भगवान विष्णु की उपासना सुख, आनंद, प्रेम, शांति के साथ बल देने वाली मानी जाती है। धार्मिक परंपराओं में विष्णु पूजा की तरह-तरह से विधि-विधान और पूजा सामग्रियों द्वारा बताई गई है। किंतु यहां बताई जा रही भगवान विष्णु की एक ऐसी पूजा जिसमें न किसी पूजा सामग्री की जरूरत होती है, न ही किसी प्रतिमा की।
विष्णु की यह पूजा मन के भावों से की जाती है, जिसे मानस पूजा भी कहते हैं। खास तौर पर विष्णु भक्ति के वैशाख महीने में मानस पूजा का फल पूजा सामग्रियों से की गई पूजा से भी शुभ और अधिक माना गया है। इस पूजा में कोई भी व्यक्ति मन के भावों से जितनी चाहे उतनी मात्रा और बेहतर पूजा सामग्रियां भगवान विष्णु को अर्पित कर सकता है। यहीं नहीं, घर हो या किसी सफर के दौरान भी इस उपाय से पूरी विष्णु पूजा की जा सकती है, क्योंकि इसमें बस, भाव ही अहम होते हैं।
-घर में हों तो सुबह स्नान कर घर के देवालय में पहले भगवान विष्णु इस मंत्र से ध्यान करें-
ॐ संशखचक्र सकिरीट कुण्डल सपीत वस्त्र सरसी रुहेश्र्णम्।
सहार वक्षस्थल कौस्तुभस्त्रियं नमामि विष्णु शिरसा चतुर्भुजम।।
- इसके बाद मन ही मन इन 16 पूजा मंत्रों से विष्णु की मानस पूजा करें-
ॐ पादयो: पाद्यं समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ हस्तयो: अघ्र्य समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ आचमनीयं समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ गन्धं समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ पुष्पं समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ पुष्पमाला समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ धूप समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ दीपं दर्शयामि नारायणाय नम:।
ॐ नैवेद्यं निवेदयामि नारायणाय नम:।
ॐ आचमनीयं समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ ऋतुफलम् समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ पुनराचमनीय समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ पूगीफलं समर्पयामि नारायणाय नम:।
ॐ आरार्तिक्यं समर्पयामि नारायणाय नम:।
ऊँ पुष्पाञ्जलि समर्पयामि नारायणाय नम:।
अंत में ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इस मंत्र का जप करें।
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