Friday, 23 May 2014

8 बातों को मन, वचन, व्यवहार में अपनाना चाहिए।

शास्त्रों के नजरिए से पाप इंसान के दु:ख और पतन का कारण तो पुण्य सुख और तरक्की का कारण होते हैं। इस वजह से सुख या दु:ख और होनी-अनहोनी का सामना इंसान को करना ही पड़ता है।
शास्त्रों में मन, वचन और कर्म से जुड़े कई पाप-पुण्य बताए गए हैं। हर सांसारिक व्यक्ति इस ज्ञान से अवगत नहीं होता। चूंकि, हर इंसान के अंदर अच्छाई के साथ जीने का भाव कहीं न कहीं मौजूद रहता है। इसलिए यहां बताई जा रही है शास्त्रों में बताई कुछ ऐसी ही बातें, जिनको पुण्य कर्म माना जाकर हर काल, स्थान और व्यक्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है। सरल शब्दों में समझें तो अगर जीवन में ज्यादा खुशी चाहते हैं तो पूरे जीवन में कम से कम ये 8 काम बार-बार भी कर गुजरने से न झिझकें। 
हिन्दू धर्मशास्त्र कहते हैं कि-

सरल शब्दों में मतलब है कि इंसान के लिये 8 बातों को मन, वचन, व्यवहार में अपनाना चाहिए। ये बाते हैं -
- सच बोलना।
- शक्ति और समय के मुताबिक दान करना।
- गुण, उम्र या किसी भी रूप में बड़े-बुजुर्गों व गुरु के प्रति सम्मान और नम्रता का भाव रखना। 
- मन में पैदा होने वाली इच्छाओं पर काबू रखना।
- सबके प्रति दया भाव रखना।
- परायी स्त्री के बारे में बोलने, सुनने या स्त्री पर कुदृष्टि डालने से बचना।
- दूसरों का धन पाने या हड़पने की भावना से दूर रहना।
- प्राणियों के प्रति अहिंसा का भाव अपनाना।

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