महाप्रलयः- सूर्य का जीवनकाल पूरा होने पर अंतिम समय में सूर्य का आकार बढ़ने लगता है साथ ही अत्याधिक उर्जा उतपन्न होती है जिससे सूर्य के सभी ग्रह एवं उपग्रह जलकर उर्जा रूप में पखिर्तित होकर सूर्य में समा जाते हैं इसे विज्ञान की भाषा में सूर्य की सुपरनोवा स्थिति कहते हैं। जब सूर्य की उर्जा अपने चरम बिंदु पर पहुंच जाती है तब यह उर्जा रूप तरंग रूप में बदल जाता है और इससे उर्जा और प्रकाश निकलना बंद हो जाता है और सूर्य ब्लेक होल में पखिर्तित हो जाता है इस तरह एक सौरमंडल का अंत हो जाता है इसका फिर पुनर्जन्म नहीं होता। जब ब्रह्मांड में ब्लेक होल की संखया बहुत अधिक बड़ जाएगी तब नए तारों का जन्म होना बंद हो जाएगा इसके बाद ब्रह्मांड का अंत होगा।
जैसा कि ईश्वर के प्रकरण में लिखा जा चुका है कि जड़ तत्व का सबसे छोटा कण परमाणु होता है एवं चेतन तत्व का सबसे सूक्ष्म रूप आत्मा होती है जो कि ईश्वर के चारों ओर प्रभामंडल के रूप में स्थित होती है। जड़ परमाणु के भीतर ही चेतन तत्व स्थित होता है एवं अलग से स्वतंत्र अवस्था में भी रह सकता है। चेतन तत्व के तरंग रूपी कण परमाणु को बिना तोड़े इससे बाहर निकल सकते हैं जैसे ही चेतन तत्व का एक कण बाहर निकलता है वैसे ही उसी प्रकार का दूसरा स्वतंत्र कण इसका स्थान ले लेता है अतः परमाणु की संरचना यथावत बनी रहती है इसमें कोई फर्क नहीं पड़ता। दो या दो से अधिक परमाणुओं के मेल से एक अणु बनता है ऐसे असंखय अणुओं के मेल से दृश्य पदार्थ का निर्माण होता है तब हम इसे अपनी आंखों से देख पाते हैं। ठोस पदार्थ में अणु एक दूसरे से मजबूती से जुड़े होते हैं इस कारण ठोस पदार्थ स्थिर होते हैं। द्रव पदार्थ में अणु मजबूती से नहीं जुड़े रहते इस कारण इन्हें खुला छोड़ देने पर यह बहने लगते हैं वायु रूप में अणु आपस में जुड़े हुऐ न होकर अलग अलग होते हैं इसलिए वायु हमें आखों से दिखाई नहीं देती एवं हल्की होने के कारण वायुमंडल में बहती रहती है। विज्ञान ने लगभग 101 अलग अलग गुण वाले परमाणुओं की खोज की है परमाणु के भीतर स्थित इलेक्ट्रान, प्रोट्रान, न्यूट्रान आदि की संखया के आधार पर परमाणु के गुण अलग अलग होते हैं परमाणु में स्थित उपरोक्त कणों के भी अलग अलग सैकड़ों गुण होते हैं, इन अलग अलग गुण वाले परमाणुओं को विज्ञान की भाषा में तत्व कहते हैं इन सभी तत्वों के मेल से हमारा शरीर बना हुआ है। प्रत्येक तत्व के परमाणु में हजारों गुण होते हैं धर्मिक ग्रन्थों में गुणों की कुल संख्या तैंतीस करोड़ बताई गई है, अलग अलग गुणों के कारण ही धरती पर या ब्रह्मांड में हर चीज जड़, चेतन, प्राणी, वनस्पति आदि अलग अलग रूपों में दिखाई देते है यदि इन सभी गुणों को हटा दिया जाय तब सिर्फ निराकार ईश्वर ही शेष बच जाता है।
जैसा कि ईश्वर के प्रकरण में लिखा जा चुका है कि जड़ तत्व का सबसे छोटा कण परमाणु होता है एवं चेतन तत्व का सबसे सूक्ष्म रूप आत्मा होती है जो कि ईश्वर के चारों ओर प्रभामंडल के रूप में स्थित होती है। जड़ परमाणु के भीतर ही चेतन तत्व स्थित होता है एवं अलग से स्वतंत्र अवस्था में भी रह सकता है। चेतन तत्व के तरंग रूपी कण परमाणु को बिना तोड़े इससे बाहर निकल सकते हैं जैसे ही चेतन तत्व का एक कण बाहर निकलता है वैसे ही उसी प्रकार का दूसरा स्वतंत्र कण इसका स्थान ले लेता है अतः परमाणु की संरचना यथावत बनी रहती है इसमें कोई फर्क नहीं पड़ता। दो या दो से अधिक परमाणुओं के मेल से एक अणु बनता है ऐसे असंखय अणुओं के मेल से दृश्य पदार्थ का निर्माण होता है तब हम इसे अपनी आंखों से देख पाते हैं। ठोस पदार्थ में अणु एक दूसरे से मजबूती से जुड़े होते हैं इस कारण ठोस पदार्थ स्थिर होते हैं। द्रव पदार्थ में अणु मजबूती से नहीं जुड़े रहते इस कारण इन्हें खुला छोड़ देने पर यह बहने लगते हैं वायु रूप में अणु आपस में जुड़े हुऐ न होकर अलग अलग होते हैं इसलिए वायु हमें आखों से दिखाई नहीं देती एवं हल्की होने के कारण वायुमंडल में बहती रहती है। विज्ञान ने लगभग 101 अलग अलग गुण वाले परमाणुओं की खोज की है परमाणु के भीतर स्थित इलेक्ट्रान, प्रोट्रान, न्यूट्रान आदि की संखया के आधार पर परमाणु के गुण अलग अलग होते हैं परमाणु में स्थित उपरोक्त कणों के भी अलग अलग सैकड़ों गुण होते हैं, इन अलग अलग गुण वाले परमाणुओं को विज्ञान की भाषा में तत्व कहते हैं इन सभी तत्वों के मेल से हमारा शरीर बना हुआ है। प्रत्येक तत्व के परमाणु में हजारों गुण होते हैं धर्मिक ग्रन्थों में गुणों की कुल संख्या तैंतीस करोड़ बताई गई है, अलग अलग गुणों के कारण ही धरती पर या ब्रह्मांड में हर चीज जड़, चेतन, प्राणी, वनस्पति आदि अलग अलग रूपों में दिखाई देते है यदि इन सभी गुणों को हटा दिया जाय तब सिर्फ निराकार ईश्वर ही शेष बच जाता है।
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