Wednesday, 14 May 2014

मरना पसंद करता है

मिरगा नाद शब्द सनेही, शब्द सुनन को जाई ।
सोई शब्द सुन प्राण देत है, तनिको न मन में डराई ।

मृग नाद में मस्त होकर अपना प्राण दे देता है । परन्तु प्राण जाने के भय से वह स्वयं को नाद से विलग नहीं रख सकता । उसी प्रकार सती और पपीहा का उदाहरण देते हैं कि सती होने वाली नारी कभी अग्नि के भय से नहीं भागती । पपीहा प्यासा ही मरना पसंद करता है परन्तु स्वाति बूँद के सिवा किसी अन्य जल का वह पान नहीं करता । दो वीर यदि युद्ध में लडते हैं तो उन्हें केवल विजय के सिवा कुछ नहीं दिखता । वे हार के डर से युद्ध भूमि से पलायन नहीं करते !!

No comments:

Post a Comment