Thursday, 8 May 2014

तूने मूर्ति कहा मैं मूरतिवान था

उतरा सागर में जो उसको मोती मिले
खोज की जिसने मेरी मुझे पा गया
नुकताची शंकावादी को मैं ना मिला
मुझको तो शबरी का भोलापन भा गया

तूने मूर्ति कहा मैं मूरतिवान था
तूने पत्थर कहा मैं भी पाषाण था
ये तो तेरे ही विश्वास की बात है
धन्ना जाट बुलाया मैं झट आ गया
नुकताची शंकावादी को मैं ना मिला
मुझको तो शबरी का भोलापन भा गया

सच तो ये है की तूने बुलाया नही
बिन बुलाए कभी मैं भी आया नही
तूने प्रेम से मुझको खिलाया नही
मैं तो विदुरानी के छिलके तक खा गया
नुकताची शंकावादी को मैं ना मिला
मुझको तो शबरी का भोलापन भा गया

प्यार तो प्यार है सीधी सी बात है
प्रेम कब पूछता है की क्या जात है
चाहे हिंदू हो चाहे कोई मुसलमान
मुझको रसख़ान सलवार पहना गया
नुकताची शंकावादी को मैं ना मिला
मुझको तो शबरी का भोलापन भा गया...!!

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