राम राघव राम राघव राम राघव रक्षमाम।
हे अवधबिहारी दयासिंधो रक्षा करो प्रभो।मुझे किसी और ने नही मेरे अपने मन ने ही पतन के कुएं मे डुबो रखाहै।जरा सी हानि हो जाए तो राम राम करता है और यदि कुछ लाभ हो तो मै मै करने लगता है।किसी की नही सुनता मनमानी करता है।इतना चतुर चंचल और बलवान है यह कि यदि कभी बलपूर्वक भजन मे लगाने का प्रयत्न करू तो हजारों मार्ग से इधर उधर भाग जाता है और मुझे पता भी नही चलता।योगी भी न जाने कितना कितना तप करने के बाद भी इसके हाथों पराजित हो जाते है तो मेरी क्या बिसात है।सही कहा गया है कि मन के हारे हार है मन के जीते जीत।लेकिन हे नाथ कैसे जीतूं मै इस मन को।यह तो सांसारिक पदार्थो की हानी को ही हानी समझता है और जो बिन राम भजन के जीवन की हानी हो रही है उस विषय मे कभी कान ही नही धरता।हे रघुनंदन अपने ही मन के हाथो ठगा गया और हारा हुआ मै आपको सहायता के लिए पुकारता हूं कि हे प्रभु आप ही मेरे मन को अपनी ओर खींच लो।इसे अपने प्रेम मे ऐसे बाँध लो कि आपको तो एक क्षण के लिए भी न भूले और सांसारिक भोगो को कभी याद न करे।हे राघवजी मै क्या करने योग्य हूं?आप ही कृपा करके रामनाम के रस मे मुझे ऐसे भीगो दो कि इससे बाहर निकलना मृत्यु से भी मुझे भयंकर लगे।हर पल रामनाम का सुमिरन और आपके स्वरूप के ध्यान मे लीन रहूं।पाहि माम हे रघुपति पाहि माम
हे अवधबिहारी दयासिंधो रक्षा करो प्रभो।मुझे किसी और ने नही मेरे अपने मन ने ही पतन के कुएं मे डुबो रखाहै।जरा सी हानि हो जाए तो राम राम करता है और यदि कुछ लाभ हो तो मै मै करने लगता है।किसी की नही सुनता मनमानी करता है।इतना चतुर चंचल और बलवान है यह कि यदि कभी बलपूर्वक भजन मे लगाने का प्रयत्न करू तो हजारों मार्ग से इधर उधर भाग जाता है और मुझे पता भी नही चलता।योगी भी न जाने कितना कितना तप करने के बाद भी इसके हाथों पराजित हो जाते है तो मेरी क्या बिसात है।सही कहा गया है कि मन के हारे हार है मन के जीते जीत।लेकिन हे नाथ कैसे जीतूं मै इस मन को।यह तो सांसारिक पदार्थो की हानी को ही हानी समझता है और जो बिन राम भजन के जीवन की हानी हो रही है उस विषय मे कभी कान ही नही धरता।हे रघुनंदन अपने ही मन के हाथो ठगा गया और हारा हुआ मै आपको सहायता के लिए पुकारता हूं कि हे प्रभु आप ही मेरे मन को अपनी ओर खींच लो।इसे अपने प्रेम मे ऐसे बाँध लो कि आपको तो एक क्षण के लिए भी न भूले और सांसारिक भोगो को कभी याद न करे।हे राघवजी मै क्या करने योग्य हूं?आप ही कृपा करके रामनाम के रस मे मुझे ऐसे भीगो दो कि इससे बाहर निकलना मृत्यु से भी मुझे भयंकर लगे।हर पल रामनाम का सुमिरन और आपके स्वरूप के ध्यान मे लीन रहूं।पाहि माम हे रघुपति पाहि माम
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