Sunday, 20 April 2014

दिन वो बहुत ही निराश अवस्था में राधा रानी को याद कर रहा था

बरसाना में फूल सखी नाम का एक मुस्लिम था यद्यपि वो एक मुस्लिम था फिर भी उसकी राधा रानी में अपार श्रद्धा थी और तो और उसकी एक बेटी थी जिसका नाम भी उसने राधा रखा था

फूल सखी सारंगी बजाने का काम करता था कोई भी उत्सव होता तो वो सारंगी बजाता और उसकी बेटी राधा उसकी धुनों पर नृत्य करती

इसी तरह देखते ही देखते उसकी बेटी
राधा बड़ी हो गयी और उसके विवाह का वक़्त आ पंहुचा राधा रानी की कृपा से उसने अपनी बेटी का विवाह बड़ी धूम धाम से किया लेकिन अपनी बेटी
के चले जाने के बाद वो निराश सा रहने लगा क्यूकि वो राधा रानी के भजनों पर सारंगी बजाय करता और उसकी बेटी राधा नृत्य किया करती थी और इन्ही सब से उसका जीवन गुजरा करता था लेकिन अब नृत्य करने वाली राधा तो ससुराल चली गयी थी इसलिए उसका सारंगी बजाने का भी मन नहीं करता था

एक दिन रात को पूर्णिमा के दिन वो बहुत ही निराश अवस्था में राधा रानी को याद कर रहा था और कह रहा था हे लाडली अब तो तेरा
भजन भी नहीं होता मेरी सारंगी की धुन पर अब कौन नाचेगी तभी उसने अचानक अपनी सारंगी उठा ली और बड़े ही भाव से
राधा रानी का भजन करते हुए उस सारंगी को बजाने लगा

वो उसी धुन में इतना डूब गया की उसे कुछ भी याद न रहा तभी लाडली जी के महल के कपाट खुलते है और उनमे से नेत्रों को अँधाकर देनी वाली अपार उजाले की चमक दिखाई पड़ती है और उसी उजाले में से एक छोटी सी गौर वर्ण की कन्या आती है और फूल सखी की सारंगी की धुन पर नाचने लगती है

फूल सखी भी इतना मदहोश हो जाता है कि वो सारंगी बजाये और वो छोटी सी कन्या नाचती ही जाए उसे कुछ भी होश न रहा और नाचते नाचते वो छोटी सी कन्या फूल सखी को महल की एक एक सीढ़ी चढ़ाती गयी और फूल सखी भी एक एक करके वो सीढिया चढ़ता ही गया और जैसे ही वो कपाट तक पंहुचा तभी महल के कपाट
बंद हो जातेहै और फूल सखी भी अंदर ही चला जाता है

और फूल सखी कहा गया आज तक किसी को मालुम न हुआ भजन करते करते करते वो राधा रानी में ही विलीन हो गया

बरसना धाम की परिक्रमा करते हुए बीच में एक मजार आती है वही पर ये कहानी लिखी हुई है

इसलिए बंधुओ कोई भी श्रद्धा से लाडली जी को याद करे तो वो उसे
अपनी ही शरण में रख लेती है और उनका शरणार्थी नित्य निरंतर श्री कुञ्ज बिहारी सरकार की दिव्या लीलाव का आनंद उठता रहता है

बोलो युगल सरकार की जय
बोलो बरसानेवाली की जय
जय जय श्री राधे श्याम
कभी न भूलो प्यारा नाम श्री राधा रानी का .

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