बदले में कुछ भी देना तो छोडो,उनसे तो हम बस लिए ही जा रहे हैं||
राधा माधव तो दयालु बहुत हैं,जो उन्होंने अपनी लगन लगायी|
पर लगी लगन में अगन ही नही है,तो कैसे निभेगी प्रेम सगाई||
राधे के नाम में शक्ति बड़ी है,उसी नाम से कृष्ण भक्ति बढ़ी है|
पग में सांसारिक बेड़ियाँ पड़ी हैं,तभी तो मुझमे बुराईयाँ बड़ी हैं||
किशोरीजी तो करुना की भंडार हैं,उनके तो मुझपे एहसानों के भरमार हैं|
मुझे हर बार क्षमा कर देती हैं वो,ये जानते हुए भी की ये तो पतितो की सरदार है||
राधा रानी तो अलबेली सरकार हैं,उनकी तो हर बात निराली है|
मेरे अवगुणों को जानते हुए भी,मेरी कभी कोई बात न टाली है||
श्रीकृष्ण तो बहुत प्यारे हैं,दोनों हाथ फैला कर हमारा इंतजार कर रहे हैं|
पर हमारी दुष्टता तो देखो,हम कैसे अपना समय बेकार कर रहे हैं||
राधा रानी की कृपा से सत्संग तो अच्छा लगने लगा|
लेकिन सत्संग के अनुरूप मेरा जीवन कहाँ बना||
मेरे जीवन की डोर तो उनके ही हाथ है|
इसलिए डर कैसा? मेरे जीवन में तो दोनों का साथ है||
मेरे अनुकूल हर काम वो बनाते हैं|
पर कितनी चतुरता से हम अपना नाम कर ले जाते हैं||
हर समय उनकी रहमत बरसती रहती है|
पर क्या मेरी नजरें उनकी याद में तरसती रहती हैं||
वो तो हर समय मेरे आस पास हैं,इस बात का तो मुझे पूरा एहसास है|
पर प्यारे मुझमे तो कुछ भी नही ख़ास है,बस आपके इक प्रेम की ही आस है||
राधा रानी ने कृपा की है,तभी तो श्याम रंग मुझपे चढ़ा है|
वरना औकात क्या है मेरी,मुझमे तो अवगुणों का भंडार भरा है||
श्याम जू को पाने के लिए राधे को आराधा है|
राधा नाम लेते ही मिटी सारी बाधा है||
महाभागा गोपियों के जीवन में तो बस कृष्ण प्रेम की बहार है|
विरह का आनंद ही बस उनके जीवन का सार है||
श्रीकृष्ण प्रेम और विरह का खूब विस्तार हो,अब तो बस यही आसा है|
श्री राधे की कृपा से मंजरी भाव और दृढ़ होगा,इसका तो विश्वासा है|
राधा माधव तो दयालु बहुत हैं,जो उन्होंने अपनी लगन लगायी|
पर लगी लगन में अगन ही नही है,तो कैसे निभेगी प्रेम सगाई||
राधे के नाम में शक्ति बड़ी है,उसी नाम से कृष्ण भक्ति बढ़ी है|
पग में सांसारिक बेड़ियाँ पड़ी हैं,तभी तो मुझमे बुराईयाँ बड़ी हैं||
किशोरीजी तो करुना की भंडार हैं,उनके तो मुझपे एहसानों के भरमार हैं|
मुझे हर बार क्षमा कर देती हैं वो,ये जानते हुए भी की ये तो पतितो की सरदार है||
राधा रानी तो अलबेली सरकार हैं,उनकी तो हर बात निराली है|
मेरे अवगुणों को जानते हुए भी,मेरी कभी कोई बात न टाली है||
श्रीकृष्ण तो बहुत प्यारे हैं,दोनों हाथ फैला कर हमारा इंतजार कर रहे हैं|
पर हमारी दुष्टता तो देखो,हम कैसे अपना समय बेकार कर रहे हैं||
राधा रानी की कृपा से सत्संग तो अच्छा लगने लगा|
लेकिन सत्संग के अनुरूप मेरा जीवन कहाँ बना||
मेरे जीवन की डोर तो उनके ही हाथ है|
इसलिए डर कैसा? मेरे जीवन में तो दोनों का साथ है||
मेरे अनुकूल हर काम वो बनाते हैं|
पर कितनी चतुरता से हम अपना नाम कर ले जाते हैं||
हर समय उनकी रहमत बरसती रहती है|
पर क्या मेरी नजरें उनकी याद में तरसती रहती हैं||
वो तो हर समय मेरे आस पास हैं,इस बात का तो मुझे पूरा एहसास है|
पर प्यारे मुझमे तो कुछ भी नही ख़ास है,बस आपके इक प्रेम की ही आस है||
राधा रानी ने कृपा की है,तभी तो श्याम रंग मुझपे चढ़ा है|
वरना औकात क्या है मेरी,मुझमे तो अवगुणों का भंडार भरा है||
श्याम जू को पाने के लिए राधे को आराधा है|
राधा नाम लेते ही मिटी सारी बाधा है||
महाभागा गोपियों के जीवन में तो बस कृष्ण प्रेम की बहार है|
विरह का आनंद ही बस उनके जीवन का सार है||
श्रीकृष्ण प्रेम और विरह का खूब विस्तार हो,अब तो बस यही आसा है|
श्री राधे की कृपा से मंजरी भाव और दृढ़ होगा,इसका तो विश्वासा है|
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