Tuesday, 22 April 2014

जैसी भूखे प्रीति अनाज ॥
त्रिखावंत जल सेती काज ॥
जैसी मूड़ कुट्मब पराइण ॥
ऐसी नामे प्रीति नराइण ॥१॥
नामे प्रीति नाराइण लागी ॥
सहज सुभाइ भइओ बैरागी ॥१॥ 
जैसी पर पुरखा रत नारी ॥
लोभी नरु धन का हितकारी ॥
कामी पुरख कामनी पिआरी ॥
ऐसी नामे प्रीति मुरारी ॥२॥

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